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शिवराज बोले पूरी दुनिया में बज रहा है आयुर्वेद का डंका : अब ‘हिंदी में होगी आयुर्वेद की पढ़ाई’, भोपाल के इस आयुर्वेदिक शासकीय चिकित्सालय का नाम देश में सबसे अच्छी पंचकर्म सेवा देने वाली संस्थाओं की सूची में हुआ शामिल

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज बोले ‘आयुर्वेद की महत्ता आज पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य अगर कहीं है तो आयुर्वेद व योग के माध्यम से ही है। मैं 24 घण्टे में से 18 घंटे तो काम करता ही हूँ, उसका कारण योग व प्राणायाम है। आयुर्वेद में केवल इलाज ही नहीं बताया गया है, बल्कि स्वस्थ कैसे रहें? यह भी बताया गया है। एलोपैथी की अपनी उपयोगिता है, लेकिन आयुर्वेद एक संपूर्ण विधा है। आयुर्वेद के क्षेत्र में गहन शोध अत्यंत आवश्यक है। एलोपैथ के क्षेत्र में पूरे विश्व में लगातार शोध हो रहे हैं। यदि हम आयुर्वेद में भी शोध को बढ़ावा देंगे, तो निरोग के संकल्प को बेहतर तरीके से साकार किया जा सकेगा। ऐसे अस्पताल हों, जहां एलोपैथी के साथ आयुर्वेद के इलाज की भी सुविधा हो। जिसको जो विधा पसंद हो, वह उस विधा में अपना इलाज कराये।’

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद साध्वी प्रज्ञा ने मंगलवार को भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक संस्थान में 50 बिस्तरीय पंचकर्म सुपर स्पेशलिटी एवं वैलनेस केंद्र एवं रजत जयंती ऑडिटोरियम भवन का लोकार्पण किया। इसी के साथ भोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेद शासकीय चिकित्सालय का नाम देश में सबसे अच्छी पंचकर्म सेवा देने वाली संस्थाओं की सूची में शामिल हो गया है। यहां पर अब किसी फाइव स्टार होटल की तरह सुविधाएं मिलेंगी औरर केरल की तर्ज पर पंचकर्म किया जाएगा। इस मौके पर सीएम शिवराज ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब  मेडिकल व इंजीनियरिंग की तरह आयुर्वेद की पढ़ाई भी हिंदी में ही होगी।

पंचकर्म सेंटर के लोकार्पण अवसर पर सीएम शिवराज ने कहा कि ‘कोविड के बाद पूरी दुनिया में आयुर्वेद का डंका बज रहा है। कोविड आया तो कोई और रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था, ऐसे में आयुर्वेद और योग के रूप में देश और दुनिया को रास्ता मिला। कोविड में एक ही रास्ता दिखा “आयुर्वेद और योग”। अत्यंत प्राचीन और महान राष्ट्र है भारत। 5000 साल से ज्यादा तो
 ज्ञात इतिहास है हमारा। जब दुनिया में सभ्यता के सूर्य का उदय नहीं हुआ था तब हमारे यहां वेदों की रचना रच दी गई थी। भारत के गांव-गांव में इलाज के लिए आयुर्वेद पर ही विश्वास किया गया। आयुर्वेद के माध्यम से गांव में ही जड़ी-बूटियों से बीमारियों का इलाज आसानी से होता रहा है। हमारे वैद्य इतने कुशल होते हैं कि नाड़ी से ही बीमारी का पता लगाकर इलाज करते हैं। आयुर्वेद एक संपूर्ण विधा है। एलोपैथी में हर बीमारी के लिए एक अलग डॉक्टर हैं। आयुर्वेद रोग की पहचान कर, उसके मूल कारण का निदान करने का प्रयास करता है। दोनों की अपनी विशेषता है।’

मुख्ममंत्री ने कहा कि ‘आयुर्वेद का बढ़ना दुनिया के हित में है। मध्यप्रदेश आयुर्वेद विश्वविद्यालय के विषय में भी विचार करेगा। हमारी सरकार आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अंग्रेजी प्रतिभा को मार रही है। प्रतिभा तो किसी भी भाषा में हो सकती है। इसलिए हमने तय किया कि मध्यप्रदेश की धरती पर मेडिकल व इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में होगी और आयुर्वेद की पढ़ाई तो हिंदी में ही होगी। बेटियों ने छात्रावास की मांग की थी उनका छात्रावास बन गया है। अगले बजट में भांजो के लिए भी छात्रावास स्वीकृत कर दिया जाएगा। मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वैदिक चिकित्सालय एक नए स्थान पर पहुंच गया है।यहां आयुर्वेद, पंचकर्म और योग का समन्वय करते हुए व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य की सारी व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां शोध प्रयोगशाला,ऑडिटोरियम व पंचकर्म की अत्याधुनिक व्यवस्था भी है।’

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